छपरी की होली या असली होली?
छपरी की होली या असली होली? होली सिर्फ़ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम और एकता का संदेश देने वाला पर्व है। यह हमें आपसी भेदभाव भूलकर एक-दूसरे को अपनाने की सीख देता है। लेकिन क्या आज की होली वही रह गई है, जिसका संदेश हमें हमारे पूर्वजों ने दिया था? क्या यह अब भी एकता और खुशियों का पर्व है, या महज़ एक बहाना बनकर रह गया है? होली का महत्व: क्यों मनाते हैं यह पर्व? होली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने उसे होलिका के चंगुल से बचाया था, जिससे यह संदेश मिलता है कि अहंकार और अधर्म की कोई जगह नहीं होती। इसके अलावा, यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जब प्रकृति नए रंगों से भर जाती है। इस त्योहार का असली मकसद समाज में प्रेम और समानता को बढ़ावा देना है। इस दिन जाति, धर्म, अमीरी-गरीबी के भेदभाव को भुलाकर सभी एक-दूसरे से गले मिलते हैं। लेकिन क्या आज हम इस मूल भावना को जीवित रख पा रहे हैं? आज की होली: त्योहार या तमाशा? आज का परिदृश्य देखें, तो होली का स्वरूप काफी बदल चुका ह...